Russia - Ukrain War 2022

रूस और यूक्रेन के बीच जंग || आखिर क्यों रूस और यूक्रेन के बीच हो रहा है युद्ध || Russia – Ukrain War 2022

Politics

रूस के साथ जारी युद्ध में यूक्रेन क्या सच में है अकेला  || जानें, आखिर क्या है नाटो की इस युद्ध में भूमिका : Russia – Ukrain War 2022

विस्तार

Russia – Ukrain War 2022 : फिलहाल खबरें सामने आ रही हैं कि यूक्रेन के राष्‍ट्रपति व्लादोमोर जेलेंस्‍की ने रूस के वार्ता संबंधी प्रस्‍ताव को स्‍वीकार कर लिया है। लेकिन ये कितना सच है इस बात का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि यूक्रेन के राष्ट्रपति ने खुद एक वीडियो हाल ही में शेयर करते हुए कहा है कि वो किसी भी हालत में देश नहीं छोडेंगे। वीडियो में उन्होंने यूक्रेन के नागरिकों से लड़ने की अपील की। यूक्रेन के नागरिक भी, जिन्होंने कभी बंदूक हाथ में नहीं थामी थी, आज जंग के मैदान में कूद गए हैं। वहीं दूसरी तरफ रूसी सेना राजधानी कीव पर कब्जा करने से केवल 30 किलोमीटर दूर ही है।

क्या अमेरिका दे सकता है यूक्रेन का साथ 

जेलेंस्की खुद ये मानते हैं कि ज्यादा दिनों तक यूक्रेन की सेना रूसी सेना का सामना नहीं कर सकेगी। संभवत: अगले 4 दिनों में रूस यूकेन की राजधानी कीव पर अपना कब्जा जमा लेगा। हालांकि इस परिस्थिति में भले ही अमेरिका सीधे तौर पर यूक्रेन का साथ न दे पा रहा हो लेकिन हथियारों की खेप भेजने से लेकर वित्तीय सहायता करने को लेकर अमेरिका युध्द में एक योद्धा की भांति सक्रिय है। फ्रांसीसी राष्ट्रपति ने भी यूक्रेन को हथियारों की खेप भेजी। कई अन्य देश और जर्मनी तक भी यूक्रेन के पक्ष में खड़ा दिख रहा है। हालांकि एशियाई देशों की इस युद्ध में सक्रियता कम ही देखने को मिल रही है। रूस के साथ अच्छे संबंधों के चलते भारत या चीन ने इस पर अभी तक रूख साफ नहीं किया है।

रूस और यूक्रेन के बीच हो रहे युद्ध का क्या है कारण 

लेकिन रूस और यूक्रेन का ये युद्ध आखिर किस कारण से हो रहा है? ये जानना बेहद जरूरी है। दरअसल, युद्ध का केंद्र है- नाटो। यूक्रेन नाटो का हिस्सा बनना चाहता है और रूस ऐसा होने नहीं देना चाहता है। सवाल ये उठता है कि रूस ऐसा आखिर क्यों नहीं होने देना चाहता क्योंकि यूक्रेन एक संप्रभु देश है। वह जो चाहे वो निर्णय ले सकता है। इसे जानने के लिए सबसे पहले ये जानना जरूरी है कि नाटो आखिर है क्या?

नाटो क्या है ? Russia – Ukrain War 2022

नाटो कई देशों की सेनाओं का एक समूह है। जिसमें मुख्यत: यूरोपीय देश शामिल हैं। 1949 में बने इस सैन्य गठबंधन में शुरुआत में 12 देश थे। इनमें अमेरिका, कनाडा, ब्रिटेन और फ्रांस शामिल थे। संगठन का मूल उद्देश्‍य दूसरे विश्व युद्ध के बाद रूस के यूरोप में विस्तार को रोकना था। हालांकि 1955 में तत्‍कालीन सोवियत रूस ने भी पूर्वी यूरोप के कुछ साम्यवादी देशों के साथ मिलकर वारसा पैक्ट नामक सैन्य गठबंधन बनाया था। लेकिन 1991 में सोवियत संघ का विघटन होने के साथ ही कई देश नाटो में शामिल हो गए। नाटो की स्थापना इस मिशन के साथ हुई थी कि अगर कोई देश कभी भी किसी नाटो में शामिल राष्ट्र पर हमला करता है तो बाकी देश, जो नाटो का हिस्सा हैं, उस देश की सहायता के लिए अपनी सेना भेजेंगे। जो कि संभवत: किसी भी देश के लिए युद्ध के माहौल में बड़ी सहायता होगी। हालांकि, कम ही देखने को मिला है कि कोई देश नाटो में शामिल किसी भी देश से टकराने की जहमत दिखाए। लेकिन यूक्रेन के साथ ऐसा नहीं है। यूक्रेन अभी नाटो का हिस्सा बना नहीं है। अगर यूक्रेन नाटो का हिस्सा बनता है तो ये पुतिन के लिए खतरनाक साबित होगा। क्योंकि यूक्रेन के ऐसा करने से नाटो की पहुंच रूस की सीमाओं तक आसानी से हो सकती है।

Russia – Ukrain War 2022 : व्लादिमिर पुतिन इसीलिए यूक्रेन को ऐसा करने से रोकना चाहते हैं। ऐसा पहले की यूक्रेन सरकार करने की एक बार चेष्टा दिखा चुकी है तब पुतिन ने यूक्रेन पर इतना दवाब बनाया कि तत्कालीन यूक्रेन सरकार ने नाटो को छोड़ रूस के साथ जाने में ही भलाई समझी। यूक्रेन की जनता को जब ये बात मालूम हुई तो सरकार गिर गई और नए राष्ट्रपति को चुना गया। जिन्होंने आते ही नाटो के साथ जुड़ने की इच्छा व्यक्त की। रूस ने इस बार भी ऐसी ही कोशिश की लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ तो रूस ने युद्ध को ही अंतिम सहारा समझा।

आखिर अमेरिका क्यों दे रहा यूक्रेन का साथ

अब जब इस स्थिति में रूस और यूक्रेन आ ही गए हैं तो नाटो के देश जो कि रूस तक पहुंच बनाना चाहते हैं, उन्होंने यूक्रेन को मदद करना शुरू कर दिया है। हालांकि अभी तक ये तय माना जा रहा था कि अगर युद्ध होगा तो अमेरिका युद्ध में सक्रिय भूमिका निभाएगा। खुद अमेरिकी राष्ट्रपति ये बात कह चुके थे कि अगर रूस यूक्रेन के खिलाफ युद्ध शुरू करता है तो उसे गंभीर परिणाम भुगतने पड़ेंगे क्योंकि अमेरिका इस कृत्य पर चुप नहीं बैठेगा। लेकिन बाइडन का ये दावा हकीकत से दूर दिखाई पड़ता है जब यूक्रेन के राष्ट्रपति सार्वजिनक मंच से कहते हैं कि अमेरिका ने उन्हें युद्ध के मैदान में अकेले छोड़ दिया है। हालांकि, अन्य देश, जो रूस के प्रतिस्पर्धी हैं, अवश्य यूक्रेन की सहायता के लिए आगे आ रहे हैं।

क्या सच में हो सकता है तृतीय विश्व युद्ध 

खुद फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने एक कार्यक्रम में शनिवार को कहा है कि यह युद्ध अभी और चलेगा। यह संकट बना रहेगा और इसके साथ आने वाले सभी संकटों के स्थायी परिणाम होंगे। दरअसल, मैक्रों की ये टिप्पणी इसलिए अहम है क्योंकि वे भली-भांति इस बात से परीचित हैं कि अगर किसी परिस्थिति में रूस फादर ऑफ ऑल बॉम्ब जैसे परमाणु हथियारों का इस्तेमाल कर देगा तो संभवत: ये तृतीय विश्व युद्ध की शुरूआत होगी।

 

Russia – Ukrain War 2022: इस युद्ध को लेकर हाल ही में रूसी रक्षा मंत्रालय ने दावा किया है कि रूसी सेना ने अब यूक्रेन के कई शहरों पर पूरी तरह से कब्जा कर लिया है। राजधानी कीव पर भी सेना बहुत जल्द कब्जा कर लेगी। यूक्रेन के खिलाफ जारी ये युद्ध को अंतिम चरण में माना जा रहा है। क्योंकि वो देश जिस से खुद अमेरिका जैसी महाशक्ति टकराने के बारे में सोचती हो तो यूक्रेन के लिए उस शक्ति के सामने टिकना हकीकत से काफी दूर नजर आता है। इस बीच रूसी सेना द्वारा मेलिटोपोल पर कब्जा करने के दावे को ब्रिटिश सशस्त्र बलों के मंत्री जेम्स हेप्पी ने नकारते हुए कहा है कि अभी कोई कब्जा नहीं हुआ है। राजधानी कीव में बख्तरबंद गाड़ियों को यूक्रेनी सेना द्वारा रोका गया है। हालांकि ये स्थिति साफ है कि यूक्रेन के पास रूस के आगे सरेंडर करने के अलावा दूसरा कोई चारा नहीं है। हालांकि यूक्रेन पूरी जद्दोजहद के साथ लगा है कि रूस का राजधानी पर कब्जा न होने पाए।

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